top of page
  • Instagram
  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn
  • YouTube

मुलुंड पश्चिम में रोजाना अंधेरा: “लोड सेटिंग” या तकनीकी लापरवाही?



मुलुंड - मुंबई | प्रतिनिधि

मुलुंड पश्चिम, रेलवे स्टेशन के समीप झवेर रोड और जे.एन. रोड परिसर में पिछले तीन से चार महीनों से प्रतिदिन शाम होते ही अंधेरे का साया छा जाता है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार रोज शाम 7:00 बजे से रात 12:00 बजे के बीच 1 से 2 घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। क्षेत्र के रहवासी इसे “लोड सेटिंग” का नाम दे रहे हैं, जबकि बिजली वितरण कंपनी Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited (MSEDCL / महावितरण) की ओर से इसे औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा रहा है।

लगातार ट्रिप हो रहे ट्रांसफॉर्मर

बताया जरह है कि मुलुंड पश्चिम रेलवे स्टेशन के बगल स्थित ट्रांसफॉर्मर तथा जे.एन. रोड स्थित कोटेश्वर प्लाज़ा परिसर के ट्रांसफॉर्मर बार-बार ट्रिप हो रहे हैं।26 फरवरी २०२६ को रात 11:30 बजे बिजली गुल हुई और 1:00 बजे बहाल की गई।आज 27 फरवरी २०२६ को रात 9:30 बजे आपूर्ति बाधित हुई और लगभग 10:17 बजे बिजली वापस आई।

यह स्थिति कोई अपवाद नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से लगभग रोज का क्रम बन चुकी है। मुलुंड महावितरण की लापरवाही।

व्यावसायिक और सामाजिक जीवन प्रभावित

यह इलाका केवल आवासीय नहीं है। यहां कई अस्पताल, बैंक, एटीएम, कोचिंग क्लासेस, दूध डेयरियां, रेस्टोरेंट और छोटे-बड़े व्यवसाय संचालित हैं।बिजली कटौती के दौरान—

  • अस्पतालों में मरीजों को असुविधा होती है,

  • बैंकिंग और एटीएम सेवाएं बाधित होती हैं,

  • दुकानदारों और रेस्टोरेंट का कारोबार प्रभावित होता है,

  • विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।

स्थानीय व्यापारी संगठनों का कहना है कि “जब बिल पूरी राशि के साथ समय पर वसूला जाता है, तो बिजली आपूर्ति में इस प्रकार की अनियमितता क्यों?”

महावितरण का जवाब

नागरिकों द्वारा संपर्क करने पर महावितरण की ओर से प्रायः यह जवाब दिया जाता है कि “लोड सेटिंग नहीं है, जांच की जा रही है।”लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि लोड सेटिंग नहीं है, तो फिर ट्रांसफॉर्मर लगातार ट्रिप क्यों हो रहे हैं? क्या क्षेत्र की बढ़ती आबादी और व्यावसायिक विस्तार के अनुरूप विद्युत अधोसंरचना को उन्नत नहीं किया गया?

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि:

1.     संबंधित ट्रांसफॉर्मरों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए।

2.    यदि क्षमता कम है तो उच्च क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाएं।

3.   क्षेत्र में होने वाली कटौती की पूर्व सूचना सार्वजनिक की जाए।

4.   समस्या का स्थायी समाधान समयबद्ध योजना के साथ घोषित किया जाए।

मुलुंड पश्चिम जैसे घनी आबादी वाले और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रतिदिन की यह अंधेरी शामें केवल असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न हैं। अब देखना यह है कि MSEDCL / महावितरण इस गंभीर मुद्दे पर कब ठोस और पारदर्शी कदम उठाता है।

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page